'तुम मुझें कभी समझ नही पायें'
ये कह कर चली गई वो
हा थोडा इंट्रोवर्ड हूँ
जादा बतीयाता नहीं
पर उसे देखना-सुनना बड़ा अच्छा लगता है मुझे
जादा बात ना करू तो दिल में प्यार नहीं होता क्या?
शायद उसकी बात सही भी हो
शायद मैं पुरी तरह से उसे समझ ना सका
पर कुछ तो होगा जो मेरे हाँथ अाया होगा
अब कैसे बताऊँ उसे
के जोरो की बारीश मे
सुखी हुई टहनी भी
दो-चार बूँदे पकड ही लेती है...
ये कह कर चली गई वो
हा थोडा इंट्रोवर्ड हूँ
जादा बतीयाता नहीं
पर उसे देखना-सुनना बड़ा अच्छा लगता है मुझे
जादा बात ना करू तो दिल में प्यार नहीं होता क्या?
शायद उसकी बात सही भी हो
शायद मैं पुरी तरह से उसे समझ ना सका
पर कुछ तो होगा जो मेरे हाँथ अाया होगा
अब कैसे बताऊँ उसे
के जोरो की बारीश मे
सुखी हुई टहनी भी
दो-चार बूँदे पकड ही लेती है...
शेवटच्या दोन ओळी कमाल आहेत. प्रत्येक जण आपल्या आपल्या वाट्याचे क्षण आपल्या चिमटीत पकडतोच.
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