आंखों पर दस्तक हुई
पलके उठी
सामने देखा
तो बारीश का माहोल था
अर्श से छलके हुए
पैमाने की बूंदे
इस हाथ गिरी तो
दिल ये मदहोश था
बादल गरजे
बिजलीया चमकी
पर सारा जहाँ
खामोश था
सादगी भरे पानी मे फिर
मेरी रूह की कश्ती चली
मै ही मांझी मै ही नय्या
मुझ मे उसी का अक्स था
आंख बंद कर लांघ दी
सहमे मकानो की गली
बिते अरसे और आंखे खुली
तब मै खानाबदोश था...
पलके उठी
सामने देखा
तो बारीश का माहोल था
अर्श से छलके हुए
पैमाने की बूंदे
इस हाथ गिरी तो
दिल ये मदहोश था
बादल गरजे
बिजलीया चमकी
पर सारा जहाँ
खामोश था
सादगी भरे पानी मे फिर
मेरी रूह की कश्ती चली
मै ही मांझी मै ही नय्या
मुझ मे उसी का अक्स था
आंख बंद कर लांघ दी
सहमे मकानो की गली
बिते अरसे और आंखे खुली
तब मै खानाबदोश था...
No comments:
Post a Comment