Saturday, July 7, 2018

बातें - ५

पर बडे छुपे रुस्तम हो तुम
भेजते नहीं अपनी कहाँनिया
अपने आफसाने
मांगना पडता है...
या फिर अब भी ऐतबार नहीं के समझ पायेंगे हम उन्हे

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शक तेरी समझदारी पे नही
मेरे तखय्युल पे है
अक्सर लगता है
जहाँ मै थम जाता हूँ, वहाँ तू शुरू होती है

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