छत्री लिए बगैर बारीश में चला जा रहा हूँ
पर अंदरसे बूँद की इक भी टपकन सुनाई नहीं दे रही...
क्या अाज बारीश का दिल कहीं अौर है?
या फिर मेरे दिल के हाथ कोई छाता लग गया है?
पर अंदरसे बूँद की इक भी टपकन सुनाई नहीं दे रही...
क्या अाज बारीश का दिल कहीं अौर है?
या फिर मेरे दिल के हाथ कोई छाता लग गया है?
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