तेरी आँखो मे ना देख पाऊ अगर मै खुद को
तो ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है?
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Sunday, February 22, 2026
Thursday, February 12, 2026
Tuesday, February 10, 2026
Friday, January 23, 2026
मांगा ही क्या था
हमारी इज़हार-ए-महोब्बत पर
ना कह गए तुम
और हम सोचते ही रह गये
आखीर हमने तुमसे माँगा ही क्या था?
Friday, July 5, 2024
अर्थ
या सृष्टीत जे जे उत्तम आहे, उदात्त आहे,
तरल, सुंदर, मोहक आहे
ते सारं मला तुझ्यासोबत अनुभवायचं आहे
कारण तुझ्या सोबतीशिवाय
त्या साऱ्याला
काहीच अर्थ नाही
Friday, March 1, 2024
नींद
तुम बीन
जिंदगी भाती है ऐसी
जिंदगी भाती है ऐसी
जैसे लंबी रात हो
और आँखो मे नींद नहीं
Monday, December 25, 2023
तेरी रोशनी
मुझे पसंद है इसलिए
शाम के वक्त
तुम दिया जलाया करती हो
वो रोशनी दिखाती है मुझे
तुम तक पहुँचने का रास्ता
प्रिये, ये रोशनी रहने देना
मुझे तुम तक आना है
Thursday, July 6, 2023
काले बादलों से
काले बादलों से भरें आसमा सा
चला जाता हूँ तेरे बगैर
तू थंडी हवाँ सी बहती आ
तो बरस भी लू
थोडा भीग भी लू
चला जाता हूँ तेरे बगैर
तू थंडी हवाँ सी बहती आ
तो बरस भी लू
थोडा भीग भी लू
Saturday, June 24, 2023
गुनाह
कुछ पल ऐसे भी होते है
जब तेरा मेरे पास ना होना
किसी गुनाह से कम नहीं होता
Tuesday, June 20, 2023
Tuesday, May 23, 2023
समझना
कभी कभी कविता लिख़ना
बड़ा कठीण लगता है
पीड़ा का अनुभव करने के साथ साथ
उसे समझना भी पड़ता है
बड़ा कठीण लगता है
पीड़ा का अनुभव करने के साथ साथ
उसे समझना भी पड़ता है
Friday, May 19, 2023
काँटा
तुम्हारे चले ज़ाने का ये परिणाम है
के ज़ब भी कोई काँटा लगता है
बस तुम याद आते हो
उस वक्त काँटे से ज़्यादा
के ज़ब भी कोई काँटा लगता है
बस तुम याद आते हो
उस वक्त काँटे से ज़्यादा
तुम्हारी याद की चुभन ज़्यादा होती है...
बिंदू
स्वतःभोवती आवर्तनं घेत
अस्थिरपणे फिरणारं एखादं चक्र
एका बिंदूपाशी जाऊन
विसावतं, स्थिरावतं...
तू माझा तो बिंदू आहेस!
अस्थिरपणे फिरणारं एखादं चक्र
एका बिंदूपाशी जाऊन
विसावतं, स्थिरावतं...
तू माझा तो बिंदू आहेस!
Thursday, May 18, 2023
अस्थिर
बड़ा अस्थिर हूँ...
गर्भ से विषामृत निकलने से पहले
वो समुद्र जैसे था
वैसे ही मै
इस वक्त़
बड़ा अस्थिर हूँ
Tuesday, May 9, 2023
Sunday, April 30, 2023
Friday, April 28, 2023
कल की रात
चाँद ढलते ढलते
इक दुख़ती नज़्म
उतर आई है कागज़ पर
वो लफ्ज़ ही जानते है
उतर आई है कागज़ पर
वो लफ्ज़ ही जानते है
क्या सितम ढाए है बिती रात ने...
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