''ये क्या हर वक्त गुस्सा करते रहते हो?''
''हा! तुम देर अाअो अौर मै गुस्सा भी ना करू?''
''अरे भाई, पाँच मिनट की ही तो देरी हुई है. मुंबई की ट्रॅफिक में उतनी भी छुंट नही दोगे क्या?''
''जाअो मुझसे बांत ना करो. अौर हा! ये मुझे भाई कहना बंद करो. अच्छा नहीं लगता मुझे.''
''तो क्या सय्या कहूँ?''
''...''
''जानती हूँ तुम्हारे दिल में क्या है! ये झगड़ो के बहाने बड़े पुराने है. यार! कुछ नया तो कर लेते! अच्छा लगता मुझे.''
''तो क्या तुम्हारे दिल में भी...''
''नहीं. तुम दोस्त ही ठिक हो.''
''हा! तुम देर अाअो अौर मै गुस्सा भी ना करू?''
''अरे भाई, पाँच मिनट की ही तो देरी हुई है. मुंबई की ट्रॅफिक में उतनी भी छुंट नही दोगे क्या?''
''जाअो मुझसे बांत ना करो. अौर हा! ये मुझे भाई कहना बंद करो. अच्छा नहीं लगता मुझे.''
''तो क्या सय्या कहूँ?''
''...''
''जानती हूँ तुम्हारे दिल में क्या है! ये झगड़ो के बहाने बड़े पुराने है. यार! कुछ नया तो कर लेते! अच्छा लगता मुझे.''
''तो क्या तुम्हारे दिल में भी...''
''नहीं. तुम दोस्त ही ठिक हो.''
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