परेल का एस.टी. स्टेशन धुँअाधार बारीश मे धुँदला दिखाई दे रहा था.
वो रिझर्व्ह की हुई विंडो सीटपर बैठ गया. बारीश का जोर बढ़ा तो सारी खिडकीयाँ बंद होने लगी. उसने खिडकी की चिटखनी बंद करने से पहले बाहर देखा. वो उलटा होता हुअा छाता अौर कंधे की बॅग संभालते हुए बस की तरफ अा रही थी. खिडकी खुली ही रहीं.
उसने बसमें कदम रखा. बस की सारी सींटे भर चुकी थी! इक उसके बगलकी छोड के...
वो उसके पास अाँके बैठी.
'क्या किस्मत इतनी भी मेहरबान होती है क्या?' उसका मन बोल पड़ा.
''सुनीए.'' वो अल्फाज उसके कानो में शहद की तरह उतरते गये.
''हां जी?''
''अगर अापको ऐतराज ना हो तो क्या हम सीट एक्सचेंज कर सकते है?''
उसको क्या ऐतराज होना था? सींटे बदली. उसने उसकी बॅग उठाकर उपर रख दी. तभी...
''सुनिए, अाप मेरी सीट पर बैठे है.'' वो पच्चीस साल का नौजवान था.
''क्या?''
''यहा मेरी रिझर्व्हेशन है.''
उसने सीट छोडी. नौजवान बैठ गया. ये देख वो उठते हुए बोली,
''अरे मेरी वजह से अाप की सींट...'' उसके अाँखो मे बड़ी सादगी थी.
''अरे बैठीये.'' उसने मुस्कुराते हुए कहाँ. वो बैठ गयी. वो वहीं बगल में खडा रहा. उसने बैठे बैठे तिरछी नज़र से उसे देखा. उन होठोंपर हलकी प्यारी मुस्कान थी. उसने तै कर लिया. अब मंजिल अाने तक यहीं टिके खड़े रहना है.
तभी फोन बजा. ''हा जानू. अच्छी सीट मिली है.'' साथ मे हसीं की चुभती किलकारी.
वो मूडा अौर सीधे जाकर ड्राईव्हर की केबिन मे घुस गया.
वो रिझर्व्ह की हुई विंडो सीटपर बैठ गया. बारीश का जोर बढ़ा तो सारी खिडकीयाँ बंद होने लगी. उसने खिडकी की चिटखनी बंद करने से पहले बाहर देखा. वो उलटा होता हुअा छाता अौर कंधे की बॅग संभालते हुए बस की तरफ अा रही थी. खिडकी खुली ही रहीं.
उसने बसमें कदम रखा. बस की सारी सींटे भर चुकी थी! इक उसके बगलकी छोड के...
वो उसके पास अाँके बैठी.
'क्या किस्मत इतनी भी मेहरबान होती है क्या?' उसका मन बोल पड़ा.
''सुनीए.'' वो अल्फाज उसके कानो में शहद की तरह उतरते गये.
''हां जी?''
''अगर अापको ऐतराज ना हो तो क्या हम सीट एक्सचेंज कर सकते है?''
उसको क्या ऐतराज होना था? सींटे बदली. उसने उसकी बॅग उठाकर उपर रख दी. तभी...
''सुनिए, अाप मेरी सीट पर बैठे है.'' वो पच्चीस साल का नौजवान था.
''क्या?''
''यहा मेरी रिझर्व्हेशन है.''
उसने सीट छोडी. नौजवान बैठ गया. ये देख वो उठते हुए बोली,
''अरे मेरी वजह से अाप की सींट...'' उसके अाँखो मे बड़ी सादगी थी.
''अरे बैठीये.'' उसने मुस्कुराते हुए कहाँ. वो बैठ गयी. वो वहीं बगल में खडा रहा. उसने बैठे बैठे तिरछी नज़र से उसे देखा. उन होठोंपर हलकी प्यारी मुस्कान थी. उसने तै कर लिया. अब मंजिल अाने तक यहीं टिके खड़े रहना है.
तभी फोन बजा. ''हा जानू. अच्छी सीट मिली है.'' साथ मे हसीं की चुभती किलकारी.
वो मूडा अौर सीधे जाकर ड्राईव्हर की केबिन मे घुस गया.
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