पहेलीयाँ मत बुझा ए शायरा!
सीधे सीधे दिल की बात कह दिया कर
पहले ही बहुत उलझ चुका हूँ
जिंदगी के पोशिदा सवालों मे
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जो सवाल पोशिदा है
उनके जवाब क्यो ढुंढ रहे हो
जो महफूज हैं जज्बात नकाबों के पीछे
उन्हे बेपर्दा क्यो कर रहे हो
खामोशी हर बार नाराजगी थोडी होती है
अनगिनत अल्फाजोंकी रीप्लेसमेंट भी होती है..
और हां जनाब...
अक्सर सुलझते नहीं वो उलझने
जिनमे दिल बेहाल हो
अकलमंदी सुलझे होने मे ही नहीं होती
बिघडेल हाल, जाल मे फंसे रहने में भी होती है..
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जिंदगी के पोशिदा सवालों मे
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जो सवाल पोशिदा है
उनके जवाब क्यो ढुंढ रहे हो
जो महफूज हैं जज्बात नकाबों के पीछे
उन्हे बेपर्दा क्यो कर रहे हो
खामोशी हर बार नाराजगी थोडी होती है
अनगिनत अल्फाजोंकी रीप्लेसमेंट भी होती है..
और हां जनाब...
अक्सर सुलझते नहीं वो उलझने
जिनमे दिल बेहाल हो
अकलमंदी सुलझे होने मे ही नहीं होती
बिघडेल हाल, जाल मे फंसे रहने में भी होती है..
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