सँडलों की आवाज करते हुए उसके कदम गाडीयों की कतार से गुजर रहे थे। अपने पैसे से खुद की गाडी लेने का उसका सपना आज पुरा होनेवाला था. किसी ने उसका नाम पुकारा. वो पिछे मुडी. पर उससे पहले ही उसने वो आवाज पहचान ली थी. उसके आँखो के सामने से कॉलेज के दिनो का स्लाईड शो गुजर गया.
वो गाडीयों की कतार की दुसरी छोर पे मुस्कुराता हुआ खडा था.
कॉलेज के दिनों का उसका पहला क्रश!
जब दोनो कॉफी शॉप से निकले तब उसने पुँछा, "यहाँ कितने दिनो तक हो?"
"बस आज की रात... कल सुबह की फ्लाईट है."
उसकी अाँखो मे पुरानी परछाईंयाँ उतर आई थी! उसे रहा न गया. वो साथ चल पडी...
हॉटेल की उँची खिडकीसे निचे अंधेरे मे बिखरी हुई रनवे की रोशनीयाँ लुभावनी लग रही थी. इक तरफ उडान भरती हुई हवाईजहाजों की हलकी आवाज थी; और दुसरी तरफ से दौडती हुई साँसो की...
रात भर बिस्तर की सिलवटे बढती रही. सालों की उलझी-अधुरी तमन्नाए सुलझाने की बडी कोशिश हुई. सूरज की आहट होने से पहले ही वो तय्यार हो गई.
उसने अाँखो मे उम्मीद लिए कहाँ, "रुक जाअो ना... या फिर मै रुक जाऊँ?"
वो सुलझी हुई आँखो से धीरे मुस्कराई. पास आकर बैठी. उसने मोबाईस मे कॉलेज की पुरानी फोटो ढूँढ निकाली.
"ये याद हे?"
"हा... पर ये तस्वीर पुरानी है. और वो वक्त भी! कभी कभी फिर से वहाँ लौटने का मन जरुर करता है, पर वहाँ हमेशा के लिए रह तो नही सकते..."
उसने कुछ ना कहाँ.
दोनो कुछ देर खामोश पलों को मेहसूस करते रहे.
फिर उसने कुछ ना बोले उसका होठोंसे शुक्रीया अदा किया.
और वो जाते जाते दरवाजा बंद कर गई...
वो गाडीयों की कतार की दुसरी छोर पे मुस्कुराता हुआ खडा था.
कॉलेज के दिनों का उसका पहला क्रश!
जब दोनो कॉफी शॉप से निकले तब उसने पुँछा, "यहाँ कितने दिनो तक हो?"
"बस आज की रात... कल सुबह की फ्लाईट है."
उसकी अाँखो मे पुरानी परछाईंयाँ उतर आई थी! उसे रहा न गया. वो साथ चल पडी...
हॉटेल की उँची खिडकीसे निचे अंधेरे मे बिखरी हुई रनवे की रोशनीयाँ लुभावनी लग रही थी. इक तरफ उडान भरती हुई हवाईजहाजों की हलकी आवाज थी; और दुसरी तरफ से दौडती हुई साँसो की...
रात भर बिस्तर की सिलवटे बढती रही. सालों की उलझी-अधुरी तमन्नाए सुलझाने की बडी कोशिश हुई. सूरज की आहट होने से पहले ही वो तय्यार हो गई.
उसने अाँखो मे उम्मीद लिए कहाँ, "रुक जाअो ना... या फिर मै रुक जाऊँ?"
वो सुलझी हुई आँखो से धीरे मुस्कराई. पास आकर बैठी. उसने मोबाईस मे कॉलेज की पुरानी फोटो ढूँढ निकाली.
"ये याद हे?"
"हा... पर ये तस्वीर पुरानी है. और वो वक्त भी! कभी कभी फिर से वहाँ लौटने का मन जरुर करता है, पर वहाँ हमेशा के लिए रह तो नही सकते..."
उसने कुछ ना कहाँ.
दोनो कुछ देर खामोश पलों को मेहसूस करते रहे.
फिर उसने कुछ ना बोले उसका होठोंसे शुक्रीया अदा किया.
और वो जाते जाते दरवाजा बंद कर गई...