वैसे तो किसी का बाप भी हम से
कुछ लिखवा नहीं सकता
पर ये बारीश लिखने पऱ
मजबूर कर देती है
मौसम की पाबंदी का आलम तो देखो
बिती यादों को अल्फाजों के जोडे मे दुल्हन सा सजा देता हूँ
कुछ लिखवा नहीं सकता
पर ये बारीश लिखने पऱ
मजबूर कर देती है
मौसम की पाबंदी का आलम तो देखो
बिती यादों को अल्फाजों के जोडे मे दुल्हन सा सजा देता हूँ
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