Friday, March 10, 2017

औलाद

सपने टुटे
चिखे चिल्‍लाए
दुनिया की खामोशी मे
किसी ने ना सुने

जख्‍म तडपे
दिनदहाडे
सारी खुली ऑंखो से
ओझल रहे

झुलसती रही
हर सोच मेरी
मंजिले चढती रही
बेफिक्रीयोंकी

और कोशिशो की
आहटे
रोंदी गई
कुचली गई...

दुनियोवालो
ना दीया करो
मेरी हैवानीयत को
खुदा का वास्‍ता

यू डराना
खुद की औलाद को
ये अच्‍छी बात
नही होती!

Tuesday, March 7, 2017

क्षणानंद

क्षण आला
मज लाभला
मनी स्पर्शला
बिलगून बसला

दिन गेले
राती सरल्या
मन अंगणात
क्षण रूजला

कैक आले
कैक गेले
मन अंतरी
क्षण जपला

पाने पिकली
नाती सुकली
गात्रे थकली
क्षण उरला

नाद गुंजला
मनी पसरला
क्षणानंद हा
कालातीत!