Tuesday, May 23, 2023

समझना

कभी कभी कविता लिख़ना
बड़ा कठीण लगता है
पीड़ा का अनुभव करने के साथ साथ
उसे समझना भी पड़ता है

Friday, May 19, 2023

काँटा

तुम्हारे चले ज़ाने का ये परिणाम है
के ज़ब भी कोई काँटा लगता है
बस तुम याद आते हो
उस वक्त काँटे से ज़्यादा 
तुम्हारी याद की चुभन ज़्यादा होती है...

बिंदू

स्वतःभोवती आवर्तनं घेत
अस्थिरपणे फिरणारं एखादं चक्र
एका बिंदूपाशी जाऊन
विसावतं, स्थिरावतं...
तू माझा तो बिंदू आहेस!

दर्द के निशान

आती गुजरती रहती है
नज़्मों की लहरें
दिल की रेत पर उभरे दर्द के निशान
फिर भी नहीं मिटते

अनकही बातें

फ़ासले बुनने वाली
अनकही बातें
जिंदगीभर
बहुत कुछ कहती रहती है

कडवी बात

हम टालते रहें उस कडवी बात को
वो बात हमे ना टाल सकी
अब यूँ फ़ासलो पर रह कर सोचते है
अच्छा होता अगर बात कर ही लेते

Thursday, May 18, 2023

अस्थिर

बड़ा अस्थिर हूँ...
गर्भ से विषामृत निकलने से पहले
वो समुद्र जैसे था
वैसे ही मै
इस वक्त़
बड़ा अस्थिर हूँ

Friday, May 12, 2023

अकेलापन

ये दूरी भी कितनी अजि़ब है?
हम ख़फ़ा हो जाते है
तुम्हारी किसी बात पर
हम तुम्हें बता नहीं पातें,
तुम हमे देख़ नहीं पाते
हम समझा नहीं पातें
तुम समझ नहीं पातें,
खुद ही रुठना है
खुद ही खुद को मनाना है
ये दुरीया जो अकेलापन ले कर आती है?
क्या वो यहीं है?

Tuesday, May 9, 2023

जिना कैसे है?

बेशक चले जाना हमे छोड़ कर
बस जाते जाते ये बताते जाना
के तुम्हारे बगैरे
जिते कैसे है?