बड़ी जोरो की बारीश हो रही है
कलम निचें रखने की भी फुरसत नहीं
इतना भीग चुके है हम
के ड़र लगता है
अगर ये ना रूकी
तो शाम तक कही किताब ना छप जाए...
कलम निचें रखने की भी फुरसत नहीं
इतना भीग चुके है हम
के ड़र लगता है
अगर ये ना रूकी
तो शाम तक कही किताब ना छप जाए...
No comments:
Post a Comment