Monday, July 2, 2018
शहर
जिंदगी की जद्दोजहत मे
कभी झाँक के खुद मे ना देखा
जिस शहर मे जिने अाया था
पता नही कब वो मुझ मे जिने लगा
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment