Wednesday, July 4, 2018

फुर्क़त

दोनो CCD मे बैठे कॉफी पी रहे थे। अास-पास चहलपहल थी।
''मै कल घर से पाँच बजे निकलेवाली हूँ।'' उसने कॉफी का घूँट लेते हुए कहाँ।
''तू तो अॉफिस मे रहेगा ना उस वक़्त? मेरी फ्लाईट अाठ बजे है। मेसेज करूँगी निकलने से पहले।''
वो कॉफी के मग को ताक रहा था।
''सुन.'' उसने निचे देखते देखते अावाज दी।
''क्या?''
उसने नजर धीरे से उपर उठाई। उसे देखाँ अौर कहाँ,
''तू मुझे अच्छी लगती है।''
उसकी कॉफी अाधे रस्ते रूक गई। फिर कुछ देर सिर्फ़ अासपास की अावाजे अाती रहीं। उसने धीरे धीरे कॉफी खत्म की अौर कहाँ।
''तेरे घर पर मेरी पॉवरबँक पडी है। अगली बार इंडिया अाऊंगी तो लेके जाऊँगी।''

वो उस रात बडी देर से सोया।

वो साडेपाँच बजे एअरपोर्ट पहुँची। वो राह देख रहा था। उसे देख वो चौकी नही।
वो पास अाया। उसका बॅग उठा लिया। दोनो चलने लगे।
थोडा वक़्त था। दोनो इक जगह बैठे। अासपास थोडा शोर था। दोनो नजदीक बैठे थे। पर अाँखे कहीं अौर थी। शायद अाँखो को खुद पर ऐतबार न था।
''तुझे पता है के मेरा लंडन जाना...''
''हा पता है!''
उसने बडी शांती के साथ कहाँ।
''कल तुने जब वो बात कहीं तो मुझे लगा के...''
''वो भी पता है।''
वो अाने-जानेवाले लोगो को देख रहा था।
''तो तू रोकेगा नही?''
''ना! तू रूकेगी नही।''
उस बात पर दोनों की नज़र मिली। बड़ी देर तक वैसी ही रही।
शायद इकदुसरें को जानना जरा जादाही हो गया था।

उसने पॉवरबँक का पाऊच उसके हाँथ मे दिया।
''क्यों ले के अाए?'' उसने कुछ नहीं कहाँ। दोनो खड़े हो गए।
फिर वो सीधे उसकी अाँखोमे देखते हुए बोला, ''देख। जरूरी नहीं होता, हर बार...'' अौर उसने बात अधुरी छोड दी... जानबुझ के।
''फिर भी...'' वो सटपटाई।
''चल छोड! ये पल बहुत अच्छा है।''
''पता है।'' वो एक कदम उसके नजदीक अाती बोली।

अनाउन्समेण्ट हुई। उसे जाना था। उसने वो नज़र पढी अौर उसे बाँहो मे समेट लिया।
धड़कन कानों तक सुनाई दे रहीं थी। अासपास नज़रें थी। पर उन दोनो नर्मसार बंद अाँखो को कुछ ना दिखा।
दूर होने से पहले होंठ करीब अाए। इक साँस की दूरीं तक...
लेकीन इकदुसरे से मिले नहीं। फाँसला कायम रहा।

वो चली गई। बहुत दूर...
पिछे मुड के देखे बिना ही चली गई।

जब होंठ नजदीक थे तो उसने धीमे से कहाँ था,
''ये फाँसला मुकम्मील ना हुअा, तो उम्र भर याद रहेगा।''
वो बोल पडा, ''ठिक! पर मुडना मत!''

दोनोभी दिल पर अजिब सा बोझ लिए चल पडे।
शायद वो फिर मिल भी जाऐं। पर वो इक साँस का फाँसला... वो अब मिट ना सकेगा!
वो उस पल मे कैद हो चुका था।

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