शहर के इक कोने मे खडा
रास्ते के मिल का वो पत्थर
बुढाँ हो चुका है
मोबाईल के हर नए व्हर्जन के साथ
जब अंग्रेजोने उसे गाडा था वहाँ
तो इक रूतबा था उसका
लोग चले अाते थे उसके पास
दुरीयोंका अंदाजा पुँछने
वो भी बता देता फिर
सिना ताने...
अाज वही सिना धसँ चुका है
रास्ते की सालाना भरन मे
वो नक्काशी समझता था
खुद पर लिखे हुए मिलों के अल्फाजो को
उनमे से कुछ अल्फाज
हवाँ के साथ चल पडे
कुछ अाज भी गडे है
सिमेंट के फुटपाथ के निचें
गुगल मॅप पर चलती है रास्तों की गुफ्तगु
पर उस बुजुर्ग के जिक्र कभी होते नही
वो खो चुका है खुद की
जबान, वजूद, रूतबा अौर मायना भी...
इक दिन कुछ कदम उसके पास अाए
बातें हुई, रोंशनी के कुछ फव्वारे उडें
अौर दुसरे दिन अख़बार में न्यूज छपीं
''अंग्रेजो के जमाने का पत्थर विकास काम मे हटायाँ जाएगा''
इतिहास की धरोहर, दस्तावेज, याँद...
ऐंसे कुछ अल्फाज बिखरे थे उस न्यूज मे
किसी ने पत्थर के पास खडे होकर न्यूज सुनाई थी...
उसे सुन कर अच्छा लगा
वो मन ही मन बुदबुदाया
''चलो, वर्तमान का ना सही
पुरी तरह से इतिहास का तो हिस्सा बन लू...''
रास्ते के मिल का वो पत्थर
बुढाँ हो चुका है
मोबाईल के हर नए व्हर्जन के साथ
जब अंग्रेजोने उसे गाडा था वहाँ
तो इक रूतबा था उसका
लोग चले अाते थे उसके पास
दुरीयोंका अंदाजा पुँछने
वो भी बता देता फिर
सिना ताने...
अाज वही सिना धसँ चुका है
रास्ते की सालाना भरन मे
वो नक्काशी समझता था
खुद पर लिखे हुए मिलों के अल्फाजो को
उनमे से कुछ अल्फाज
हवाँ के साथ चल पडे
कुछ अाज भी गडे है
सिमेंट के फुटपाथ के निचें
गुगल मॅप पर चलती है रास्तों की गुफ्तगु
पर उस बुजुर्ग के जिक्र कभी होते नही
वो खो चुका है खुद की
जबान, वजूद, रूतबा अौर मायना भी...
इक दिन कुछ कदम उसके पास अाए
बातें हुई, रोंशनी के कुछ फव्वारे उडें
अौर दुसरे दिन अख़बार में न्यूज छपीं
''अंग्रेजो के जमाने का पत्थर विकास काम मे हटायाँ जाएगा''
इतिहास की धरोहर, दस्तावेज, याँद...
ऐंसे कुछ अल्फाज बिखरे थे उस न्यूज मे
किसी ने पत्थर के पास खडे होकर न्यूज सुनाई थी...
उसे सुन कर अच्छा लगा
वो मन ही मन बुदबुदाया
''चलो, वर्तमान का ना सही
पुरी तरह से इतिहास का तो हिस्सा बन लू...''
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