Monday, July 16, 2018

छाता

याद है,
हम बारीश मे दादर के सडकोंपर घंटो घुमा करते थे
दुनिया को भूलकर, छातो-रेनकोटों से मुँह मोड कर
खुद का जर्रा जर्रा भिगो लेना बडा अच्छा लगता था...
उस वक्त समझ में नहीं आता था,
के मुझे बारीश जादा प्यारी है या तुम?
फिर उस सवाल का जवाब भी मिल गया

बाय द वे, मेरी शादी हो चुकी है
दो महिनो पहले...
पहले त्योहार जैसी पहली बारीश आई है
अौर मैने कल ही नया छाता खरीद लिया है

No comments:

Post a Comment