''This fucking traffic...''
वो चिढ़ा हुअा था!
गुगल मॅप पर बांद्रा से कांदिवली तक लाल रंग की लंबी लाईन दिखा रही थी। वो एक घंटे से बैठे बैठे उब चुका था। अॉफिस मे हुई अनबन अभी तक सर मे गटर के पानी जैसी बह रही थी। उबर की कार की थंडी हवाँ मे वो उस बात को भुलने की कोशिश कर ही रहा था, के तभी उसने मोबाईल की स्क्रीनपर लाल कतार देख ली। वो समझ गया की जिंदगी के अगले तीन घंटे ये ट्रॅफिक निगलने वाला है। उसका सर घुम गया।
मुँह से गाली निकलते ही उसने रिअर व्हू मिरर मे देखा। ड्राईव्हर की अाँखे उसीको देख रही थी। दोनो की नजरें अाईने मे इकदुसरे से टकराई। फिर झट से यहाँ वहाँ देखने लगी। उसके मोबाईल की बॅटरी उतर चुकी थी। बाहर बेजान गाडीयाँ खडी थी। शिशें बंद थे। सारा माहोल किसी पेंटींग के जैसा दिख रहा था। बडी बोअर पेंटींग थी।
उसने अागे देखा। ड्राईव्हर बाहर देख रहा था। उसने गाडी मे बैठते वक्त ड्राईव्हर को डाँट दिया था। क्या मेरी भडास उसपर निकल गई? उसे थोडा बुरा लगा। अब ड्राईव्हर रेडीअो के बटन घुमा रहा था। उन दोनो के बिच की पिछले घंटेभर की चुप्पी को तोंडा अौर कहाँ,
''भय्याजी, ये गाडी अापकी है?''
---
अाज सुबस से वो बडा घुमा था। एक के बाद एक काम! दोपहर का खाना भी ठिक तरीके से खा न सका था। सुबह इक बंदे से झगडा हो गया था। रूल्स के मुताबिक वो उसे कुछ बोल ना सका, इसीलिए उसका दिमाग मन ही मन मे उससे लड रहा था। बाहर का गरम अौर अंदर का थंडा मौसम उसे हमेशाही अनईझीनेस की तकलिफ देता था।
उसे कुर्ला मे कॉल मिला। उसने स्वस्तिक पार्क से सवारी को उठाया अौर सायन के रास्ते चल पडा। वो उसकी गाडी मे बैठनेवाले हर यात्री से हसीं खुशीं बात करता। उन्हे गुड मॉर्निंग-गुड नाईट कहता। लोग खुश हो जाते। पर इस सवारी के मिजाज पहले से ही बिगडे हुए थे। सावरी ने गाडी कुछ कदम अागें पार्क करने की बात पर उसे बडा डाँट दिया था। वो चुप रहा।
गाडी बांद्रा तक पहुँचने मे घंटाभर लग गया। कांदिवली की मंजिल ट्रॅफिक की लहरों पर दूर निकली दिखाई दे रही थी। कम से कम तीन घंटे। उसने कॅल्क्युलेशन कर ली। क्या करे तब तक? पिछे दुसरा कोई बैठा होता तो उसने बात छेड दी होती। पता नही ये सवारी अौर किस बात पर चिढं जाए। तभी...
''This fucking traffic...''
उसने रिअर व्ह्यू मिरर मे देखा। सवारी उसी की तरफ देख रही थी। उसने झट से अाँखे घुमा ली। बाहर देखाँ। गाडीया पत्थर के जैसी खडी थी। उसकी कार कई अलग अलग गाडींयों से घिरी हुई थी। उपर से कोई ब्रिज गुजरा था। अासमान भी दिख नही रहा था। जिंदगी रूक गई थी। फँस गयी थी।
वो सोच ही रहा था के गाने चला दूँ, तभी सवारी की अावाज अाई।
''भय्याजी, ये गाडी अापकी है?''
उसके चेहरे पे मुस्कान अाई। उसने नजरें रिअर व्ह्यू मिरर की तरफ मोडीं।
गाडीयां अागे बढ़ने लगी।
ट्रॅफिक खुल रहा था।
वो चिढ़ा हुअा था!
गुगल मॅप पर बांद्रा से कांदिवली तक लाल रंग की लंबी लाईन दिखा रही थी। वो एक घंटे से बैठे बैठे उब चुका था। अॉफिस मे हुई अनबन अभी तक सर मे गटर के पानी जैसी बह रही थी। उबर की कार की थंडी हवाँ मे वो उस बात को भुलने की कोशिश कर ही रहा था, के तभी उसने मोबाईल की स्क्रीनपर लाल कतार देख ली। वो समझ गया की जिंदगी के अगले तीन घंटे ये ट्रॅफिक निगलने वाला है। उसका सर घुम गया।
मुँह से गाली निकलते ही उसने रिअर व्हू मिरर मे देखा। ड्राईव्हर की अाँखे उसीको देख रही थी। दोनो की नजरें अाईने मे इकदुसरे से टकराई। फिर झट से यहाँ वहाँ देखने लगी। उसके मोबाईल की बॅटरी उतर चुकी थी। बाहर बेजान गाडीयाँ खडी थी। शिशें बंद थे। सारा माहोल किसी पेंटींग के जैसा दिख रहा था। बडी बोअर पेंटींग थी।
उसने अागे देखा। ड्राईव्हर बाहर देख रहा था। उसने गाडी मे बैठते वक्त ड्राईव्हर को डाँट दिया था। क्या मेरी भडास उसपर निकल गई? उसे थोडा बुरा लगा। अब ड्राईव्हर रेडीअो के बटन घुमा रहा था। उन दोनो के बिच की पिछले घंटेभर की चुप्पी को तोंडा अौर कहाँ,
''भय्याजी, ये गाडी अापकी है?''
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अाज सुबस से वो बडा घुमा था। एक के बाद एक काम! दोपहर का खाना भी ठिक तरीके से खा न सका था। सुबह इक बंदे से झगडा हो गया था। रूल्स के मुताबिक वो उसे कुछ बोल ना सका, इसीलिए उसका दिमाग मन ही मन मे उससे लड रहा था। बाहर का गरम अौर अंदर का थंडा मौसम उसे हमेशाही अनईझीनेस की तकलिफ देता था।
उसे कुर्ला मे कॉल मिला। उसने स्वस्तिक पार्क से सवारी को उठाया अौर सायन के रास्ते चल पडा। वो उसकी गाडी मे बैठनेवाले हर यात्री से हसीं खुशीं बात करता। उन्हे गुड मॉर्निंग-गुड नाईट कहता। लोग खुश हो जाते। पर इस सवारी के मिजाज पहले से ही बिगडे हुए थे। सावरी ने गाडी कुछ कदम अागें पार्क करने की बात पर उसे बडा डाँट दिया था। वो चुप रहा।
गाडी बांद्रा तक पहुँचने मे घंटाभर लग गया। कांदिवली की मंजिल ट्रॅफिक की लहरों पर दूर निकली दिखाई दे रही थी। कम से कम तीन घंटे। उसने कॅल्क्युलेशन कर ली। क्या करे तब तक? पिछे दुसरा कोई बैठा होता तो उसने बात छेड दी होती। पता नही ये सवारी अौर किस बात पर चिढं जाए। तभी...
''This fucking traffic...''
उसने रिअर व्ह्यू मिरर मे देखा। सवारी उसी की तरफ देख रही थी। उसने झट से अाँखे घुमा ली। बाहर देखाँ। गाडीया पत्थर के जैसी खडी थी। उसकी कार कई अलग अलग गाडींयों से घिरी हुई थी। उपर से कोई ब्रिज गुजरा था। अासमान भी दिख नही रहा था। जिंदगी रूक गई थी। फँस गयी थी।
वो सोच ही रहा था के गाने चला दूँ, तभी सवारी की अावाज अाई।
''भय्याजी, ये गाडी अापकी है?''
उसके चेहरे पे मुस्कान अाई। उसने नजरें रिअर व्ह्यू मिरर की तरफ मोडीं।
गाडीयां अागे बढ़ने लगी।
ट्रॅफिक खुल रहा था।
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