इन्कार नही हैं... पर इन्तजार तो हैं
इम्तीहान आखिर मेरे सब्र का ही हैं
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वादे पुरे करने की नही
उन्हे पुरा करने के समय की उलझन है
कमब्ख्त मेरे वादे ही है कुछ ऐसे
दुनिया के वक्त-ए-रस्म को मानते ही नही
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दौर ए वक्त मुताबिक किये वादे
वक्त के हाथ पुरे हुवे भी तो
वक्त के साथ बीत जायेंगे
पर कुछ वादे वक्त पे ना किये तो
आपका सही वक्त बीत जायेगा
इम्तीहान आखिर मेरे सब्र का ही हैं
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वादे पुरे करने की नही
उन्हे पुरा करने के समय की उलझन है
कमब्ख्त मेरे वादे ही है कुछ ऐसे
दुनिया के वक्त-ए-रस्म को मानते ही नही
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दौर ए वक्त मुताबिक किये वादे
वक्त के हाथ पुरे हुवे भी तो
वक्त के साथ बीत जायेंगे
पर कुछ वादे वक्त पे ना किये तो
आपका सही वक्त बीत जायेगा
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