अाज ईद के मौके पर
जब तेरे दोनो हाथ उपर उठेंगे
मुझे यकीन है तेरी दुअा मे
दुसरों का नाम होगा
अौरो की कहानीयों मे
खुद को भूल जाना
ये अासान बात नही होती
खुद से जुदा होना
अौर फिर अौरो का हो जाना...
क्या पाक रूह पाई है तुने!
दर्या के कई रंग
तुझमे नजर अाते है मुझको
तू खामोश बहती
किनारो की बाते सुनती
शाद, पर चुपचाप सी...
तेरे पानी मे जो अक्स है
उसमे भी
तेरे अपनो के साये है
पर तू नही
तू कही नही!
ये तेरा होकर भी ना होना
या फिर किसी का राजदार बन जाना
ये चार चाँद है सारे
तेरे वजूद पे लगे हुए
तू मिट्टी सी घनी
पहली नर्म बारीश सी प्यारी
या फिर तू है शाम-ए-रंगीन
घर लौंटनेवाले पंछीयों को
सहलाती हुई...
काश मै भी तेरी तरह खुद से परे देख पाऊँ
काश मै भी तेरे कुछ रंग ओढ पाऊँ
तुझ मे मेरा अक्स नजर अाता ही है
काश मै भी तेरा अक्स बन जाऊँ
ए दोस्त...
अब अौर क्या कहूँ?
बस्स!
शुक्रीया... तेरा होने का
अौरो की कहानीयों मे
खुद को भूल जाना
ये अासान बात नही होती
खुद से जुदा होना
अौर फिर अौरो का हो जाना...
क्या पाक रूह पाई है तुने!
दर्या के कई रंग
तुझमे नजर अाते है मुझको
तू खामोश बहती
किनारो की बाते सुनती
शाद, पर चुपचाप सी...
तेरे पानी मे जो अक्स है
उसमे भी
तेरे अपनो के साये है
पर तू नही
तू कही नही!
ये तेरा होकर भी ना होना
या फिर किसी का राजदार बन जाना
ये चार चाँद है सारे
तेरे वजूद पे लगे हुए
तू मिट्टी सी घनी
पहली नर्म बारीश सी प्यारी
या फिर तू है शाम-ए-रंगीन
घर लौंटनेवाले पंछीयों को
सहलाती हुई...
काश मै भी तेरी तरह खुद से परे देख पाऊँ
काश मै भी तेरे कुछ रंग ओढ पाऊँ
तुझ मे मेरा अक्स नजर अाता ही है
काश मै भी तेरा अक्स बन जाऊँ
ए दोस्त...
अब अौर क्या कहूँ?
बस्स!
शुक्रीया... तेरा होने का
No comments:
Post a Comment