कल लिख रहा था
नज्म कही अधुरे रास्ते मे अटक गई थी
अासमान मे सुखें पडे थे
तब खयाल अाया
अगर बारीश हो तो ये नज्म पुरी कर लूँ
ना वो अाई
ना नज्म पुरी हुई
नज्म कही अधुरे रास्ते मे अटक गई थी
अासमान मे सुखें पडे थे
तब खयाल अाया
अगर बारीश हो तो ये नज्म पुरी कर लूँ
ना वो अाई
ना नज्म पुरी हुई
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