ये कहना के मुतासिर हुए हमसे आप
बेहतर बहाना है रूस्वॉं करने का
----
ये क्या बात हुई मोहतरमा?
शायद यहीं सुनना बाकी था अापसें!
कुछ असर होते है अाप की नज्मो के हमपर
कुछ साफ साफ नजर अाते है, कुछ पोशीदा होते है
उनमे कभी उमदा सोच होती है,
तो कभी तखय्युल के नए अंदाज होते है
हमे भाँती है वो नज्मे...
वो अल्फाज!
जैसे कोई साहिर गुलझार की खुशबू
भाँ जाए किसी मुसाफिर को
हम है मुतासिर
तो कहने मे डर कैसा?
यही सोंच के हमारे जज्बात जाहीर किए हमने!
अापको रूस्वाँ करने का खयाल कतेही ना था दिल मे
हमारी रग़बत अापको बुरी लगी हो तो
माफ किजिएगा...
पर क्या करे!
अब हर किसी को तो नही मिलता मौका
ऐसी किसी शायरा से गुफ्तगु करने का...
---
ये आपका रद ए अमाल..ये आपका अंदाज..
पढते वक्त कही मुस्कूरा रही थी तो कही ब्लश कर रही थी...आपकी रागबत से वुरा तो नाही लगा पर खयाल हैं की इस कदर आपका अंदाज बयॉं होगा तो बार बार नाराज जरुर होना चाहिए
और जनाब क्या खूब उर्दू का जायका पकडा हैं..कित्ना हसीन लिखा हैं..ये आपकी पेशकश की मरजावा
हम नाचिज तो बस सीधा साधा लीखते जिसे आप उपरी औ हदा देकर हमारी हौसला अफजाई करते हो..
अभी तो आपसे जलन हो रही है..
---
इतना सीधा और साधा लिखती हो
के हमारी मेहनत से बनी हर नज्म शर्मा जाती है... के हाय!
मै 'शायद' खूबसूरत हूँ,
पर ये सादगी कहाँ से लाऊ?
बेहतर बहाना है रूस्वॉं करने का
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ये क्या बात हुई मोहतरमा?
शायद यहीं सुनना बाकी था अापसें!
कुछ असर होते है अाप की नज्मो के हमपर
कुछ साफ साफ नजर अाते है, कुछ पोशीदा होते है
उनमे कभी उमदा सोच होती है,
तो कभी तखय्युल के नए अंदाज होते है
हमे भाँती है वो नज्मे...
वो अल्फाज!
जैसे कोई साहिर गुलझार की खुशबू
भाँ जाए किसी मुसाफिर को
हम है मुतासिर
तो कहने मे डर कैसा?
यही सोंच के हमारे जज्बात जाहीर किए हमने!
अापको रूस्वाँ करने का खयाल कतेही ना था दिल मे
हमारी रग़बत अापको बुरी लगी हो तो
माफ किजिएगा...
पर क्या करे!
अब हर किसी को तो नही मिलता मौका
ऐसी किसी शायरा से गुफ्तगु करने का...
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ये आपका रद ए अमाल..ये आपका अंदाज..
पढते वक्त कही मुस्कूरा रही थी तो कही ब्लश कर रही थी...आपकी रागबत से वुरा तो नाही लगा पर खयाल हैं की इस कदर आपका अंदाज बयॉं होगा तो बार बार नाराज जरुर होना चाहिए
और जनाब क्या खूब उर्दू का जायका पकडा हैं..कित्ना हसीन लिखा हैं..ये आपकी पेशकश की मरजावा
हम नाचिज तो बस सीधा साधा लीखते जिसे आप उपरी औ हदा देकर हमारी हौसला अफजाई करते हो..
अभी तो आपसे जलन हो रही है..
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इतना सीधा और साधा लिखती हो
के हमारी मेहनत से बनी हर नज्म शर्मा जाती है... के हाय!
मै 'शायद' खूबसूरत हूँ,
पर ये सादगी कहाँ से लाऊ?
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