Wednesday, February 22, 2023

ए चाँद

ए चाँद ना बहा अश्क तू ज़मीं से बिछड़ के 
ऐसा तो नहीं उसे प्यार नहीं तुझ से
ज़मीं अपने दायरे मे इश्क तो किया करती है
वरना क्यों घूम ज़ाती होगी ये दुनिया हर रोज़
बस तुझे इक नज़र फ़िर देख़ने के लिए...

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