Friday, April 28, 2023

कल की रात

चाँद ढलते ढलते
इक दुख़ती नज़्म
उतर आई है कागज़ पर
वो लफ्ज़ ही जानते है
क्या सितम ढाए है बिती रात ने...

No comments:

Post a Comment