Thursday, April 13, 2023

देहलीज़

रात के उस वक्त़
मेरा ज़िस्म तुम्हारी मांसपेशीयों की सरसराहट मे मश्गुल होना चाहता है
तब मै तुम्हारे भीतर झाँकने की कोशिश करता हूँ
तुम अक्सर चुप्पी साधे बंद कर लेती हो अपनी दोनो आँखे 
और मै!
घर से निकाल बाहर किए गए किसी बेघर की तरह
तुम्हारी जिस्म की दहलीज पर चक्कर काँटता रहता हूँ...

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