Thursday, January 19, 2023

सार्थक

नदीके उस किनारे खड़ा
तुम्हारा घर देखता हूँ
दिल करे तो अपने किनारे के पानी को
छू लिया करता हूँ
कभी वक्त मिले तो
अपने किनारे का पानी छू लेना तुमभी
तेरे-मेरे बीच फैला हुआ
ये जीवन सार्थक हो जाए

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