ए दिल क्यों ढूँढता है
दर्द की तू वजह हजार
यूँ बेचैनी मे सुकून ढूँढने की
आदत बुरी है तेरी
टूट कर बिखरा जो तू
क्यों समेटना तुझे आया नहीं?
खुद को दे रहा ये सजा तू क्यों?
उन्ही टुकडो पे चलकर नंगे कदम
याँदे भी होती है बेवफा बेवफा
धुँदली होती है ये वक्त के चले
इनके भरोसे ना तू रुक यहाँ
क्या इक बेवफाई से तेरा दिल भरा नहीं?
चल ढूँढते है गुलशन कोई
वफाँ के फुल हो जहाँ खिले
जहाँ लफ्ज़ ना छेडे जख्म़ कोई
बस अपनीवाली छाँव हो!
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