Thursday, October 6, 2022

इक लंबी नज्म

 उनके आने से पेहले औरे आने के बाद भी
दिलो दिमाग मे बस उसकाही खयाँल छाया रहता है
बतीयाता हूँ उनसे, कुछ पुछता हूँ, कुछ बताता हूँ
लगता है वो पास रहे मेरे
हर दम, हर घडी
शायद यही वजह है के
आजकल मेरी नज्मे कुछ जादाही लंबी हो रही है

बडे जोश मे होता है आगाज़ उनके साथ
पर अंजाम तक जाते जाते जी कतराता है
उसका साथ छोडने को दिल नही करता
इक अजिब सा, डराडरा खयाल रहता है दिल मे
के यहाँ कागज पर ये खत्म हो जाए,
और वहाँ मै...
शायद यही वजह है के
आजकल मेरी नज्मे कुछ जादाही लंबी हो रही है

सितमगर की याद मे
जैसे कोई रात लंबी हो जाए
पैमाने की छुअन से
दिल का जख्म जैसे बहता चला जाए
गहरी खाई मे गिरनेवाला ख्बाब
जैसे अंजाम तक ना पहुँच पाए
बस उस लंबे ख्बाब जैसी
आजकल मेरी नज्मे बडीही लंबी हो रही है...

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