Friday, May 12, 2023

अकेलापन

ये दूरी भी कितनी अजि़ब है?
हम ख़फ़ा हो जाते है
तुम्हारी किसी बात पर
हम तुम्हें बता नहीं पातें,
तुम हमे देख़ नहीं पाते
हम समझा नहीं पातें
तुम समझ नहीं पातें,
खुद ही रुठना है
खुद ही खुद को मनाना है
ये दुरीया जो अकेलापन ले कर आती है?
क्या वो यहीं है?

No comments:

Post a Comment