Friday, September 27, 2019

जीना

इस साल उलझने कुछ यू बढी
के ये दर्द मेहसूस भी ना हुअा
ना कोई जख्म कुरेदा
ना कोई याद उभरी
ना कोई जाम बना
ना कोई साकी जना
ना उलझने बढी
ना दिल मचला
ना मैफिल सजी
ना नज्म बनी
बस,
बिना कोई दर्द मेहसूस करे
खुशहाली से जी रहे है
अब तुम ही कहो
ये भी कोई जीना हुअा?

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