Friday, June 2, 2023

सहर

अनकही के बोझ तले
दबे हुए सन्नाटे ने
बड़ी गहरी रात
बिखेरी है जज़्बात पर
मुझे इंतज़ार है
तेरी आवाज़ का
तू पुकार ले
तो सहर हो जाए मेरी...

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