ए मुसाफिर चलता जा
बेखौफ तू तेरी राह पर
जुस्तजू का लुत्फ उठा
फासलो का ना तू खयाल कर
जो मुश्कील नही वो राह नही
फिर जिंदगी से तकरार क्यू?
आरजू जन्नत की है
तो दर्द से इन्कार क्यू?
तेरा अक्स भी मुझ्तार है
खुद से तेरा यल्गार है
मुकालिब हो तू डर से तेरे
खुद ही का हो तू राहबर
तू सफर से इखलास रख
जिंदा तू तेरी प्यास रख
उस मोड पे है सेहर तेरी
तू सब्र रख... उम्मीद रख
सर उठा तू सॉंस ले
ना रोक तू तेरे कदम
हर लम्हा तू जी ले जरा
आगाज कर... यल्गार कर
बेखौफ तू तेरी राह पर
जुस्तजू का लुत्फ उठा
फासलो का ना तू खयाल कर
जो मुश्कील नही वो राह नही
फिर जिंदगी से तकरार क्यू?
आरजू जन्नत की है
तो दर्द से इन्कार क्यू?
तेरा अक्स भी मुझ्तार है
खुद से तेरा यल्गार है
मुकालिब हो तू डर से तेरे
खुद ही का हो तू राहबर
तू सफर से इखलास रख
जिंदा तू तेरी प्यास रख
उस मोड पे है सेहर तेरी
तू सब्र रख... उम्मीद रख
सर उठा तू सॉंस ले
ना रोक तू तेरे कदम
हर लम्हा तू जी ले जरा
आगाज कर... यल्गार कर
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